मिर्गी में माखडतेंदु, गाय का सींग और सर्पगन्धा, सभी का प्रयोग कड़े नियम से बंधा

मिर्गी में माखडतेंदु, गाय का सींग और सर्पगन्धा, सभी का प्रयोग कड़े नियम से बंधा
पंकज अवधिया  

यह माखडतेंदु की लकड़ी से बना पाटा है. इसमें आप आराम से बैठिये. ये मिर्गी के रोगियों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है.

मैंने आपाके द्वारा भेजी गयी आयुर्वेदिक औषधीयों की लम्बी सूची देखी. यह भी देखा कि आप उच्च रक्तचाप, अस्थमा और मधुमेह रोग से परेशान है. मिर्गी की समस्या तो है ही और साथ ही आप किडनी रोग से भी प्रभावित है. 

आप बनारस के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिले और अब चाहते हैं कि मैं उनके द्वारा लिखी गयी पर्ची की जांच करके अपनी टिप्पणी करूं.

ऐसा आप क्यों करना चाहते हैं यह मेरी समझ से परे है पर ऐसा लगता है कि उनके द्वारा दी गयी औषधीयों से या तो आपको कम लाभ हो रहा है या कुछ परेशानी हो रही है. आपने बताया कि आपने उनसे दोबारा मिलने की कोशिश की पर उन्होंने तीन महीने के बाद आने को कहा है और तब तक इन औषधीयों के नियमित सेवन की सलाह दी है.

सफेद गाय के बाएं सींग की अंगूठी बनाकर बाएं हाथ की छोटी अंगुली में पहनने की सलाह उन्होंने दी है और आश्वस्त किया है कि इससे मिर्गी के दौरे कम आयेंगे.

आप इसे भले ही अंध-विश्वास माने पर मैंने भारतीय चिकित्सा से जुड़े प्राचीन ग्रन्थों में ऐसे उपायों को पढ़ा है. इसकी वैज्ञानिक व्याख्या भले ही ठीक से न की जा सके पर मिर्गी के लिए ये उपाय बहुत से लोगों को कारगर लगा है. इसलिए मैं बनारस के इस चिकित्सक की बात को काटना नही चाहूंगा. यह आपकी मर्जी है कि आप इस उपाय को करे या न करे.

उन्होंने आपको सर्पगन्धा दिया है. यह मिर्गी के अलावा हाई ब्लड प्रेशर की जानी-मानी दवा है. आपने बताया कि आप इसे पंसारी की दुकान से लेते हैं. मेरा कहना है कि आप कीड़े लगी खोखली जड़ लेने से बचें और सम्भव हो तो किसी फार्मेसी द्वारा बनाई हुयी दवा ले ताकि शुद्धता की गारंटी हो.

वैसे अस्थमा के रोगियों को सर्पगंधा का प्रयोग बहुत सम्भल कर करना चाहिए और किडनी के रोगों में तो सर्पगन्धा का प्रयोग बिलकुल भी नही करना चाहिए.

मुझे आश्चर्य है कि कैसे आपको ये दोनों प्रकार के रोग होते हुए भी माननीय चिकित्सक ने सर्पगंधा का अनुमोदन किया और वो भी इतनी अधिक मात्रा में.

आपको बताना चाहूंगा कि इतनी अधिक मात्रा में सर्पगन्धा लेने  अस्थमा और किडनी के रोग बढ़ सकते हैं. यदि आपको “Ulcerative Colitis” है तो आपकी जान पर भी बन सकती थी. 

सर्पगन्धा की अधिक मात्रा दस्त तो करती है साथ ही मानसिक अवसाद भी पैदा करती है. यह आपकी कामशक्ति को भी निम्नतम स्तर तक घटा देती है.

आप चाहते हैं कि मैं बनारस के माननीय चिकित्सक से इस बारे में बात करूं और सर्पगन्धा बंद करने को कहूँ. ऐसा मैं नही करने वाला. उन्होंने अपने दीर्घ अनुभव से यह अनुमोदित किया होगा और यह उनके निज क्षेत्र में दखल होगा.

वो तो आपने जिद की इसलिए मैंने उनकी पर्ची पर अपनी प्रतिक्रिया दी.


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