कैंसर में अतीस और फिर सूजन, बड़ी अनसुलझी सी उलझन

कैंसर में अतीस और फिर सूजन, बड़ी अनसुलझी सी उलझन

पंकज अवधिया

चरण-स्पर्श नही आप तो गले मिलिये. वैसे भी आप मेरे गुरु भाई हैं.

आपके पिता के साथ जंगल में रहकर मैंने आठ महीनों तक कैंसर में उपयोगी जड़ी-बूटियों पर शोध किया. उनका जाना मेरे लिए बड़ा पीडादायक रहा पर तुम तो जानते ही हो कि वे नित नई वनस्पतियों की तलाश में रहते थे और किसी भी अनजान जड़ी-बूटी को मुंह में डाल देते थे.
हम उन्हें डराते तो कहते थे कि जब स्वाद ही पता न रहेगा तो इसके गुण कैसे पता चलेंगे और गुण पता नही चलेंगे तो मैं इसे रोगियों को कैसे दे पाउँगा.

इसी आत्मविश्वास के चलते उन्होंने पता नही अमरकंटक की पहाड़ियों में ऐसा क्या खा लिया कि चार दिनों तक बेहोश रहे और फिर हम सब से विदा हो लिए हमेशा के लिए. उनके शिष्यों ने अपना सारा ज्ञान लगा दिया गुरु को बचाने में. मैंने भी कई बाहरी लेप आजमाए पर हम उनको नही बचा पाए.

गुरु भाई , आपने बताया कि पिताजी के जाने के बाद आपने दवा देनी श्रुरू कर दी है. उनके ही नक्शे कदम पर चल रहे हैं. आपका मेरा पास आना महज औपचारिकता नही है बल्कि आप अपनी स्वास्थ समस्या लेकर आये हैं. मैं आपकी पूरी मदद करूंगा.

आपने बताया कि आपले हाथ-पैर में सूजन रहती है और सुबह की अपेक्षा शाम को अधिक रहती है. आपने पहले अपनी दवा की और फिर आस-पास के वैद्यों को दिखाया. आपने दिल्ली के चक्कर भी मारे पर जब स्टीराइड के थक गये तो मुझसे मिलने आये हैं.

आपने बताया कि जब-जब आप घर से दूर रहे आपको सूजन से राहत मिली और इसलिए अब आपने अपना घर बस्ती से बाहर अपने खेत में बना लिया है पर फिर भी समस्या का समाधान नही हो रहा है.

गुरु भाई , आपके पिताजी कैंसर के जाने-माने विशेषज्ञ थे और उन्होंने असंख्य रोगियों को जीवन दिया है. वे अतीस का प्रयोग करते रहे हैं और आपके घर में लगातार हिमालय से अतीस की जड़ आती रही हैं.

आपके पिता शाम को उसका शोधन किया करते थे और फिर सुबह उसे दवा के रूप में रोगियों को दिया करते थे.

वे चौबीसों घंटे एक विशेष प्रकार का तेल लगाया करते थे जिसकी गंध से घर वाले हमेशा परेशान रहते थे. आपकी माँ से कई बार उनका इसी तेल को लेकर झगड़ा हुआ और जब आप पैदा नही हुए थे तो आपकी माँ तीन-चार महीनों के लिए मायके चली गयी थी. बाद में लम्बे समय में उन्हें इस तेल की आदत हो गयी थी. वहां रहते हुए मैंने उन्हें कई बार तेल लगाये हुए देखा था.

गुरु भाई, आपने बताया कि आप अपने पिताजी की हर बात मानते रहे पर  तेल पर कभी सहमत नही हुए. आप अब तेल नही लगाते हैं.

गुरु भाई , अतीस का पौधा बहुत जहरीला होता है. संजीवनी वटी बनाने के लिए जब उसका शोधन करते हैं तो शोधन करने वाले व्यक्ति के हाथ-पैर में सूजन आ जाती है. कभी-कभी तो यह सूजन आँखों तक पहुंच जाती है. विष का असर कई घंटों तक रहता है पर अच्छी नींद से इसका प्रभाव कुछ कम हो जाता है.

गुरु भाई , इसी सूजन से बचने के लिए आपके पिताजी गंध वाला तेल चौबीसों घंटे लगाये रहते थे. इससे उन्हें बड़ा कष्ट होता होगा पर अतीस के विष से सुरक्षा के लिए यह जरूरी है.

मेरा सुझाव यही है कि आप भी तेल लगायें और इस सूजन से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएँ.

आपके पधारने का धन्यवाद. मैं हल्का महसूस कर रहा हूँ गुरूदक्षिणा का एक भाग दे कर.


सर्वाधिकार सुरक्षित

Comments

Popular posts from this blog

Some well known and promising traditional formulations and home remedies of Chhattisgarh, India needing scientific explanation. 6-405. [Compilation of Summaries and Research Articles] (New comments and results of recent [year 2005 onwards] Ethnobotanical surveys)

गुलसकरी के साथ प्रयोग की जाने वाली अमरकंटक की जड़ी-बूटियाँ:कुछ उपयोगी कड़ियाँ

तेलिया कंद से चमत्कारिक कैंसर उपचार: ठगी का एक और माध्यम