कैंसर में गुग्गुल, अनुमोदित मात्रा से अधिक की न करे भूल

कैंसर में गुग्गुल, अनुमोदित मात्रा से अधिक की न करे भूल
पंकज अवधिया

आपके चिकित्सक कैंसर का इलाज कर रहे हैं या आपको बेमौत मारने का प्रबंध.

पिछले दो वर्षों में आप एक सौ चालीसवे रोगी हैं जिन्होंने मुझसे संपर्क किया मालवा क्षेत्र के आयुर्वेद चिकित्सक से इलाज  कराने के बाद.  मुझे बताया गया है कि वे प्रोस्टेट कैंसर की चिकित्सा में महारत रखते हैं और उन्होंने बहुत से लोगों को ठीक किया है.

बहुत कमजोर और बूढ़े मरीजों पर उनकी दवा उल्टा असर करती है-ऐसा मालूम पड़ता है क्योंकि उनके ज्यादातर ऐसे रोगी बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या स्वर्ग सिधार जाते हैं. उनमे से बहुत से रोगी मेरे पास चले आते हैं. आप भी ऐसे ही रोगी हैं.

मुझे एक बार उन आयुर्वेद चिकित्सक से मिलने का अवसर मिला था. वे नाम बदलकर मुझसे मिलने आये थे. उन्होंने बड़ी शान से फार्मूले के बारे में बताया और मुझसे अनुरोध किया कि मैं अपने लेखों में उनके बारे में लिखूं ताकि अधिक से अधिक रोगी उनके पास आयें.

उनके फार्मूले को देखने के बाद मैंने उनसे यही प्रश्न किया कि आप कैंसर का इलाज कर रहे हैं या रोगियों को बेमौत मारने का प्रबंध.

ये सुनकर वे बिफर गये. मुझे उनके फार्मूले में बहुत से दोष दिखे थे.  मुझे तभी  लगा था कि यदि इसे कोई बुजुर्ग रोगी खाता होगा तो एक सप्ताह के अंदर उसकी हालत बिगड़ने लगती होगी और यदि फिर भी फार्मूले का उपयोग जारी रखा जाता होगा तो उसकी मृत्यु हो जाती होगी. चिकित्सक को लगता होगा कि मौत कैंसर से हुयी होगी.

मैंने उस समय पूछा था कि आपने इतनी अधिक मात्रा में गुग्गुल का प्रयोग क्यों किया है अपने फार्मूले में तो वे बोले कि गुग्गुल में कैंसर को ठीक करने की ताकत है. उनकी बात सही थी पर अधिक मात्रा में गुग्गुल शरीर को तेजी से कमजोर कर देता है जिससे कैंसर तेजी से बढने लगता है.

गुग्गुल के प्रयोग से पहले दक्ष पारम्परिक चिकित्सक हमेशा रोगी के बल और आयु को विचार लेते हैं. उन्हें मालूम है कि गुग्गुल का गलत प्रयोग अक्सर जानलेवा साबित होता है.

मालवा के ये चिकित्सक सभी उम्र के रोगियों को एक ही फार्मूला दे रहे थे आँखे मूंदकर. इसलिए मैंने उन्हें टोका.

फिर मैंने उनसे गुग्गुल लेकर पारम्परिक विधियों से परीक्षण किया तो उसमे मिलावट मिली. मैंने उनसे कहा कि आप शुद्ध गुग्गुल का ही प्रयोग करें.

उनके फार्मूले में एक विषैली वनस्पति मिली जिसका गुग्गुल के साथ प्रयोग किडनी को खराब कर देता है. मैंने उन्हें इस वनस्पति को हटाने का सुझाव दिया पर उन्होंने होशियारी दिखाते हुए फार्मूले में किडनी के लिए उपयोगी एक बूटी और जोड़ दी.

वापस जाने के बाद वे कैंसर की चिकित्सा में भिड गये और आज भी इसी फार्मूले से चिकित्सा कर रहे हैं.

उनके पास से आये रोगियों की किडनी फेल होने के कगार पर होती है. हाथ-पैरों में सूजन होती है और शरीर पर नाना-नाना प्रकार के फोड़े-फुंसी. कैंसर की अंतिम अवस्था में वे पहुंच चुके होते हैं और फिर उन्हें आराम पहुँचाने का कोई रास्ता नही सूझता है.

पर आप निराश न हो मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करुंगा आपको इस तकलीफ से बाहर निकालने के लिए.  


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