कैंसर में सफेद भगोरा और सफेद मूशाली, शोधन के बाद ही हैं शक्तिशाली

कैंसर में सफेद भगोरा और सफेद मूशाली,  शोधन के बाद ही हैं शक्तिशाली
पंकज अवधिया

प्रोफेसर साहब, मैं आपके फार्मूले का फैन हो गया हूँ. पिछले बीस से भी अधिक वर्षों से आप रक्त कैंसर के लिए जड़ी-बूटियों पर शोध कर रहे हैं और अब आपने चालीस जड़ी-बूटियों से तैयार फार्मूला  विकसित कर लिया है.

पहले आपने इसे प्रयोगशाला जीवों पर आजमाया और फिर सैकड़ों कैंसर रोगियों पर आजमा चुके हैं.  आपको अच्छी सफलता मिली है.

आप पिछली बार जब मेरे पास आये थे मैंने आपसे पूछा था कि आपने जिन रोगियों को इसे दिया क्या वे सब कृत्रिम रोशनी में रहने के आदी थे तो आपने बताया था कि  अस्पताल में लम्बे समय से चिकित्सा करवा रहे रोगियों पर आपने ये प्रयोग किये थे.

मेरा कहना था कि इस फार्मूले में कूछ ऐसी वनस्पतियाँ हैं  जिनके कारण यदि रोगी कुछ समय के लिए भी सूर्य के प्रकाश में जाएगा तो उसे तेज सिरदर्द हो जाएगा और लम्बे समय तक प्रकाश में रहने से उसे कई तरह की स्वास्थ समस्याओं का सामना करना होगा.

आपको पहले तो विश्वास नही हुआ पर जब आपने अपने रोगियों को सूर्य का प्रकाश दिखाया तो उनकी तबियत बिगड़ने लगी. तब आपने मुझसे फिर से संपर्क किया और फार्मूले का दोष हटाने को कहा.

लम्बे चिन्तन मनन के बाद मैंने चार ऐसी वनस्पतियों की पहचान की जिनके कारण यह सब हो रहा था. इनमे सफेद भगोरा और सफेद मूशाली (सफेद मूसली नही) को अलग से पहचाना गया और फार्मूले से हटा दिया गया.

इससे रोगियों को सूर्य के प्रकाश में होने वाली समस्याएं तो कम हो गयी पर कैंसर के लिए यह फार्मूला कम असरकारी हो गया.

इसके बाद इन दोनों  वनस्पतियों को उपचारित करने की योजना बनाई गयी. लम्बे उपचार के बाद इन वनस्पतियों से नुकसान करने वाले प्राकृतिक रसायनों को हटाने में सफलता मिली.

फार्मूले को फिर विकसित किया गया. अबकी बार रोगियों को कैंसर में लाभ भी हुआ और साथ ही उन्हें सूर्य के प्रकाश में कोई परेशानी नही हुयी.

प्रोफेसर साहब, अब आपके पास एक परफेक्ट फार्मूला है.  मुझे लगता है कि इसमें और सुधार की गुंजाइश है. इसे और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है. आप भी इस बात को जानते हैं इसलिए आपने आज मिलने का समय लिया है.

चलिए चर्चा शुरू करें.  


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