कैंसर में बन्दर रोटी या वांदर रोटी, गुणों में खरी दिखने में भले ही छोटी

कैंसर में बन्दर रोटी या वांदर रोटी, गुणों में खरी दिखने में भले ही छोटी
पंकज अवधिया

बन्दर पापडी, बन्दर बूटी और बन्दर रोटी भी नही आपको तलाश है वांदर रोटी की और वो भी स्किन कैंसर की चिकित्सा के लिए. आप कहते हैं कि आपने  सभी जगह तलाश कर ली है पर फिर भी आपको यह बूटी नही मिली. आपने नेपाल और बांग्लादेश में भी इसकी तलाश की.

आप कैंसर पर शोध कर रहे हैं और आपका कहना है कि किसी साधु ने आपको इस बूटी का नाम बताया है. 

मैंने आपसे कहा था कि यह बन्दर रोटी के करीब की कोई बूटी है. बन्दर रोटी का प्रयोग पारम्परिक चिकित्सक पागल कुत्ते के काटने पर करते हैं. इसका प्रयोग उनके बीच लोकप्रिय है.

कैंसर के लिए छत्तीसगढ़ के पारम्परिक चिकित्सक इसका प्रयोग कम ही करते हैं क्योंकि इसका शक्तिशाली विकल्प उनके पास है .

उड़ीसा के पारम्परिक चिकित्सक त्वचा रोगों की चिकित्सा में इसका प्रयोग करते हैं पर कैंसर में इसकी उपयोगिता के बारे में वे कम ही जानते हैं.

मैंने अपने डेटाबेस से आपको देश के अलग-अलग भागों मे बन्दर बूटी के नाम से पहचानी जाने वाली चालीस बूटियाँ दिखाई पर आप उनमे अपनी बूटी तलाश नही पाए.

आपने बताया कि साधु ने इसके साथ धोबन नामक लकड़ी के चूर्ण के प्रयोग की सलाह भी दी थी. मेरे डेटाबेस के अनुसार कोंकण क्षेत्र के पारम्परिक चिकित्सक धोबन के साथ बन्दर बूटी का प्रयोग नासूर की चिकित्सा में करते हैं. स्किन कैंसर में वे इसका प्रयोग नही करते हैं.

इस आधार पर जब मैंने कोंकण के पारम्परिक चिकित्सकों से फोन पर बात की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि बन्दर रोटी को ही उनके क्षेत्र में  वांदर रोटी कहा जाता है. आप कोंकण के पारम्परिक चिकित्सकों से इसे प्राप्त कर सकते हैं.

आप इसे लेकर कर्नाटक के पारम्परिक चिकित्सकों से भी मिलें. वे इसका प्रयोग स्किन कैंसर सहित दूसरे कैंसरों की चिकित्सा में करते हैं पर वे अपने पारम्परिक ज्ञान को गोपनीय रखते हैं.

हो सकता है कि यदि आप अपने शोध कार्यों के बारे में उन्हें बताएं तो वे आपको कुछ जानकारियाँ दे दे.

मैंने कर्नाटक में कैंसर के लिए प्रयोग किये जाने वाले जिन दस हजार से अधिक पारम्परिक नुस्खों का  दस्तावेजीकरण किया है उनमे बन्दर बूटी पर आधारित नुस्खे भी हैं. कर्नाटक के अलग-अलग भागों में इसे अलग-अलग नामो से पहचाना जाता है. आप बूटी दिखाएँगे तो वे आसानी से पहचान लेंगे.  

मैं आपको बताना चाहूंगा कि वे बन्दर बूटी को नीम और हल्दी के घोल से काफी समय तक सींचते हैं और उसके बाद उसे जंगल से लेकर आते हैं. इस तरह के उपचार से उनका मानना है कि बूटी औषधीय गुणों से परिपूर्ण हो जाती है.

आप अपने शोध कार्य में इस दुर्लभ पारमपरिक ज्ञान को भी शामिल करें ताकि शोध निष्कर्षों से पूरी दुनिया को लाभ हो सके.

मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.  


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