कैंसर से पहले पानी का सपना, शरीर बचा कर रखें अपना

कैंसर से पहले पानी का सपना,  शरीर बचा कर रखें अपना
पंकज अवधिया



एक ही नही बहुत सारे लक्षणों की जानकारी आपके पारम्परिक चिकित्सक लेते होंगे. यह उनके उपचार का तरीका है.

आपको मुंह का कैंसर था और वर्ष २०१० में कई दौर की सर्जरी और रेडियेशन थेरेपी के बाद आप कैंसर से मुक्त हो गये.

अब आपको हमेशा मन में डर लगा रहता है कि कहीं कैंसर दोबारा न हो जाए. आप नियमित जांच के लिए मुंबई जाते हैं.

आपने मुझसे भी समपर्क किया था. मैंने आपको एक पारम्परिक चिकित्सक से नियमित रूप से मिलने को कहा था ताकि पारम्परिक विधियों से भी आपकी जांच होती रहे. 

आपने बताया कि पारम्परिक चिकित्सक हर बार पूछते हैं कि कहीं आपको पानी से सम्बन्धित सपना तो नही आ रहा है. जैसे आप पानी में गिर पड़े हैं या आप किसी बड़े जलाशय के किनारे खड़े हुए हैं या आप झरने में नहा रहे हैं या आपके कपड़े भीगे हुए हैं और आप बदल नही पा रहे हैं. 

आपको ऐसे सपने नही आते थे पर पिछले कुछ दिनों से ऐसे सपने आ रहे हैं. आपने जब यह बात पारम्परिक चिकित्सक को बताई तो उन्होंने आप से कैंसर की दवा शुरू करने को कहा.

आपने मुम्बई के डाक्टर से भी बात की पर उन्होंने जांच रिपोर्ट के आधार पर कैंसर के दोबारा होने की सम्भावना से साफ इनकार कर दिया. आप असमंजस में थे इसलिए आपने मुझसे मिलने का समय लिया है. मैं आपकी मदद करूंगा.

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि हमारे चिकित्सा से सम्बन्धित प्राचीन ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि पानी वाले सपनों का सम्बन्ध फेफड़ों से है.

पहले ऐसे सपनों के आधार पर यक्ष्मा की पहचान की जाती थी. केवल इसी लक्ष्ण के आधार पर जानकार कभी कोई निष्कर्ष नही निकालते थे. वे और भी परीक्षण करते थे पर पानी वाला सपना भी एक आधार होता था.

आज भी बहुत से पारम्परिक चिकित्सक विशेषकर कैंसर की चिकित्सा में महारत रखने वाले पारम्परिक चिकित्सक अपने रोगियों से बार-बार पूछते हैं कि क्या उन्हें पानी वाले सपने आ रहे हैं.

रोगियों के हां कहने पर वे विस्तार से इन सपनों के बारे में पूछते हैं और फिर दूसरे परीक्षणों के बाद कैंसर की दवा शुरू करते हैं. वे मान लेते हैं कि कैंसर कुछ ही समय में अपना उग्र रूप धारण करने वाला है इसलिए जरूरी है कि सिर उठाने से पहले ही उसका फन कुचल दिया जाए.

मैंने सैकड़ों मामलो में यह पाया है कि जिस अवस्था में पारम्परिक चिकित्सक कैंसर की बात कहते हैं उस अवस्था में आधुनिक जांच रिपोर्ट में कुछ भी नही आता है और रोगी निश्चिन्त हो जाता है.

कुछ समय बाद उसके शरीर में लक्ष्ण आते हैं और जब वह फिर से डाक्टर के पास जाता है तो पता चलता है कि कैंसर तेजी से अपने पैर जमा रहा है.

मैं आपको यही सलाह देना चाहता हूँ कि आप पारम्परिक चिकित्सक की बात मानकर उनसे दवा लेना शुरू करें. इसी में समझदारी है.   

मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.
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सर्वाधिकार सुरक्षित
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