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Showing posts from July, 2016

कैंसर में भृंगराज से जान का खतरा, बूटी नही उगने का स्थान जहर भरा

कैंसर में भृंगराज से जान का खतरा, बूटी नही उगने का स्थान जहर भरा पंकज अवधिया आपका परिवार पीढीयों से आम लोगों की सेवा कर रहा है. आप केरल से हैं और कैंसर के रोगियों के लिए दवाएं देते हैं. आपने बताया कि सुबह से आपके घर के सामने रोगियों की लम्बी कतार लगती है जो रात तक खत्म नही होती है. आप गुटखे के कारण होने वाले मुंह के कैंसर की दवा ही देते हैं. आपने बताया कि रोगियों को खाली पेट एक काढा दिया जाता है जिसमे बाईस किस्म की जड़ी-बूटियाँ होती हैं. यह काढा आप बिना किसी परिवर्तन के पीढीयों से इस्तमाल कर रहे हैं.और इसके बारे में आपके परिवार के बाहर किसी को जानकारी नही है. आपने बताया कि पिछले कुछ समय से जब आप यह काढा रोगियों को देते हैं तो उनके मुंह में थूक की मात्रा बढ़ जाती है और उनको सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. आपको लगता है कि इस काढ़े का प्रयोग अब कैंसर को फैला रहा है. इसके लिए आप कैंसर को दोषी मानते है जिसपर अब बहुत सी दवाओं का असर नही होता है. पर आपके दादा का कहना है कि उनके काढ़े में ही दोष है. इसलिए आपने राज्य के आयुर्वेद संस्थान से संपर्क किया जिन्होंने आपको मुझसे

कैंसर में कीमोथेरेपी से खराब नर्वस सिस्टम, देसी बूटियों में सुधारने का है दम

कैंसर में कीमोथेरेपी से खराब नर्वस सिस्टम,  देसी बूटियों में सुधारने का है दम पंकज अवधिया नैन्सी के बारे में सुनकर अच्छा लगा. आप इतनी दूर से यह खबर लेकर आये है आप आराम से बैठिये.  मैं आपके लिए हर्बल टी मंगवाता हूँ. मुझे याद आता है कि नैन्सी ने सबसे पहले मुझसे उस समय सम्पर्क किया था जब पहली बार उसे कीमोथेरेपी लेने के लिए डाक्टरों ने कहा था. नैन्सी कनाडा की रहने वाली है और उसे बेस्ट कैंसर है. नैन्सी को पता था कि कीमोथेरेपी के अपने फायदे और नुकसान है. इसलिए वह चाहती थी कि मैं उसे कुछ ऐसी जड़ी-बूटियाँ दूं जिससे कीमोथेरेपी से होने वाले स्थायी नुकसानो से बचा जा सके. मैंने एक महीने के लिए चुनी हुयी जड़ी-बूटियाँ अनुमोदित की थी. सारी जानकारियाँ और जड़ी-बूटियाँ उस तक पहुंच गयी पर किसी कारणवश वो इन्हें कीमोथेरेपी के पहले नही ले सकी. कीमोथेरेपी के बाद से उसके हाथों और पैरों के तेज दर्द रहने लगा. डाक्टरों ने पहले तो दर्द नाशक दवाएं दी फिर जांच करके बताया कि कीमोथेरेपी से नर्वस सिस्टम को स्थायी  नुकसान हुआ है. इसलिए दर्द कभी पूरी तरह से खत्म नही होगा. नैन्सी को फिर मेरी याद

कैंसर में गुग्गुल, अनुमोदित मात्रा से अधिक की न करे भूल

कैंसर में गुग्गुल, अनुमोदित मात्रा से अधिक की न करे भूल पंकज अवधिया आपके चिकित्सक कैंसर का इलाज कर रहे हैं या आपको बेमौत मारने का प्रबंध. पिछले दो वर्षों में आप एक सौ चालीसवे रोगी हैं जिन्होंने मुझसे संपर्क किया मालवा क्षेत्र के आयुर्वेद चिकित्सक से इलाज  कराने के बाद.  मुझे बताया गया है कि वे प्रोस्टेट कैंसर की चिकित्सा में महारत रखते हैं और उन्होंने बहुत से लोगों को ठीक किया है. बहुत कमजोर और बूढ़े मरीजों पर उनकी दवा उल्टा असर करती है-ऐसा मालूम पड़ता है क्योंकि उनके ज्यादातर ऐसे रोगी बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या स्वर्ग सिधार जाते हैं. उनमे से बहुत से रोगी मेरे पास चले आते हैं. आप भी ऐसे ही रोगी हैं. मुझे एक बार उन आयुर्वेद चिकित्सक से मिलने का अवसर मिला था. वे नाम बदलकर मुझसे मिलने आये थे. उन्होंने बड़ी शान से फार्मूले के बारे में बताया और मुझसे अनुरोध किया कि मैं अपने लेखों में उनके बारे में लिखूं ताकि अधिक से अधिक रोगी उनके पास आयें. उनके फार्मूले को देखने के बाद मैंने उनसे यही प्रश्न किया कि आप कैंसर का इलाज कर रहे हैं या रोगियों को बेमौत मारने का प्रबंध.

कैंसर में सफेद भगोरा और सफेद मूशाली, शोधन के बाद ही हैं शक्तिशाली

कैंसर में सफेद भगोरा और सफेद मूशाली,  शोधन के बाद ही हैं शक्तिशाली पंकज अवधिया प्रोफेसर साहब, मैं आपके फार्मूले का फैन हो गया हूँ. पिछले बीस से भी अधिक वर्षों से आप रक्त कैंसर के लिए जड़ी-बूटियों पर शोध कर रहे हैं और अब आपने चालीस जड़ी-बूटियों से तैयार फार्मूला  विकसित कर लिया है. पहले आपने इसे प्रयोगशाला जीवों पर आजमाया और फिर सैकड़ों कैंसर रोगियों पर आजमा चुके हैं.  आपको अच्छी सफलता मिली है. आप पिछली बार जब मेरे पास आये थे मैंने आपसे पूछा था कि आपने जिन रोगियों को इसे दिया क्या वे सब कृत्रिम रोशनी में रहने के आदी थे तो आपने बताया था कि  अस्पताल में लम्बे समय से चिकित्सा करवा रहे रोगियों पर आपने ये प्रयोग किये थे. मेरा कहना था कि इस फार्मूले में कूछ ऐसी वनस्पतियाँ हैं  जिनके कारण यदि रोगी कुछ समय के लिए भी सूर्य के प्रकाश में जाएगा तो उसे तेज सिरदर्द हो जाएगा और लम्बे समय तक प्रकाश में रहने से उसे कई तरह की स्वास्थ समस्याओं का सामना करना होगा. आपको पहले तो विश्वास नही हुआ पर जब आपने अपने रोगियों को सूर्य का प्रकाश दिखाया तो उनकी तबियत बिगड़ने लगी. तब आपने मुझसे फिर

कैंसर में मार्फीन और अरिष्ट, फिर तो अनिष्ट ही अनिष्ट

कैंसर में मार्फीन और अरिष्ट, फिर तो अनिष्ट ही अनिष्ट पंकज अवधिया आपका बेटा कैंसर की अंतिम अवस्था में है और दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में इलाज करवा रहा है. एक सप्ताह से उसकी हालत बिगड़ रही है और सांस में तकलीफ के कारण उसे बार-बार आक्सीजन देनी पड़ रही है. उसे बार-बार उल्टियां भी हो रही हैं. पिछले तीन दिनों से उसका बायाँ हाथ काँप रहा है और शरीर के बहुत से अंग फड़क रहे हैं. आपके चिकित्सक कहते हैं कि कैंसर अब दिमाग तक पहुंच गया है जिसके कारण ऐसे लक्ष्ण आ रहे हैं. वे यह भी कहते हैं कि अब बेटे के पास गिनती के दिन हैं. पिछली रात चिकित्सकों ने कह दिया कि यह आख़िरी रात है तब आपने आनन-फानन में मुझे बुलवा लिया. कुछ घंटों की सूचना पर मैं विमान में सवार होकर दिल्ली पहुंच गया  और अस्पताल में अचेत पड़े आपके बेटे को देखा. आधुनिक दवाएं उसे दी जा रही थी. कैंसर की तीव्र पीड़ा पर काबू पाने के लिए मार्फीन के इंजेक्शन अनुमोदित मात्रा से कहीं अधिक मात्रा में लगाये जा रहे थे. लखनऊ के जाने-माने वैद्य की दवा भी चल रही थी. आपकी पत्नी ने बंगाल के प्रसिद्ध होम्योपैथ से भी दवा ले रखी थी. ये दवाएं अस्पता

कैंसर में चित्रक है कठिन, चिकित्सा करें इसके बिन

कैंसर में चित्रक है कठिन, चिकित्सा करें इसके बिन पंकज अवधिया   तो मामला बहुत अधिक बिगड़ गया है. आपके रोगी की हालत तेजी से बिगडती जा रही हैं , इसलिए आप अपने मरीज के साथ एयर एम्बुलेंस से मेरे पास आ गये हैं. मैंने तो आपको फोन पर बताया था कि मेरा कोई अस्पताल नही है. अब आप संकट में है कि रोगी को कहां रखा जाए. आपने उसे होटल में रखा हुआ है और मुझसे  मिलने आ गये हैं. बेहतर यह होता कि आप कोलकाता से अकेले आते और रोगी को वही रहने देते. खैर, अब बिना वक्त गंवाए आपसे बात की जाए. आपने बताया कि आप कैंसर की चिकित्सा करते हैं और इस रोगी का उपचार पिछले दो वर्षों से कर रहे हैं. सब कुछ ठीक चल रहा था पर दस दिन पहले आपने नया फार्मूला देना शुरू किया तब से स्थिति बिगड़ी और बिगडती चली गयी. रोगी का वजन तेजी से घटा और वह बहुत अधिक कमजोर हो गया. इसके साथ ही उसे उल्टियां होने लगी और पूरे शरीर में फुंसियां होने लगी. उसके आँखों के नीचे कालापन बढ़ गया है और उसे कम दिखाई देने लगा है. उसके बचने की कम उम्मीद है. आपको लगता है कि यह कैंसर के फैलने के कारण हो रहा है. मुझे आपका अनुमान गलत लगता है. यह सब

कैंसर में श्रीलंका की इपाला, हमारी चिटकी ने जाने कितनो को सम्भाला

कैंसर में श्रीलंका  की  इपाला, हमारी चिटकी ने जाने कितनो को सम्भाला पंकज अवधिया   जी मैं इपाला को जानता हूँ. थाइराइद कैंसर के रोगियों पर यह रामबाण की तरह कार्य करती है. आप सभी श्रीलंका से आये हैं और कैंसर विशेषज्ञ हैं. आपने अपने रोगियों पर इपाला का सफल प्रयोग किया है और अब दुनिया भर के कैंसर विशेषज्ञों के बीच इसका प्रचार कर रहें हैं. यह अच्छी बात है कि आपने इपाला का कोई व्यवसायिक उत्पाद नही बनाया है और केवल वनस्पति के बारे में ही बता रहे हैं. इपाला वनस्पति का श्रीलंका में स्थानीय नाम  है. आप सभी का स्वागत है. इपाला का प्रयोग न केवल थाइराइद कैंसर में बल्कि दूसरे कैंसरों में भी होता है. हमारे पारम्परिक चिकित्सक इसका प्रयोग हजारों औषधीय मिश्रणों में करते हैं और इन सभी मिश्रणों में इपाला की अहम भूमिका होती हैं. थाइराइद कैंसर में इसकी विशेष भूमिका होती है. मैंने अपने अनुभव से जाना है कि कैंसर की अंतिम अवस्था में भी यह जादू की तरह कार्य करती है. आप भले ही केवल इपाला का  प्रचार कर रहे हैं पूरी दुनिया में पर आप भी इस बात को मानते हैं कि केवल इपाला ही कारगर नही है. इ

कैंसर के ज्वर के लिए त्रिफला, काकजंघा के साथ अपने घर का भला

कैंसर के ज्वर के लिए त्रिफला, काकजंघा के साथ अपने घर का भला पंकज अवधिया त्रिफला निश्चित ही ज्वर में उपयोगी है. पर कैंसर के रोगियों को होने वाले ज्वर में त्रिफला का प्रयोग अक्सर कारगर सिद्ध नही होता है. आपका कहना सही है. कैंसर में ज्वर में त्रिफला की उपयोगिता पर चर्चा करने के लिए आपने मुझसे समय लिया है. त्रिफला में हर्रा , बहेड़ा और आंवला को बराबर मात्रा में डाला जाता है और बाजार में उपलब्ध त्रिफला में तो ये तीनो घटक बराबार मात्रा में होते हैं. पर पारम्परिक चिकित्सक इन तीनो घटकों को अलग-अलग अनुपात में मिलाते हैं अलग –अलग रोगों की चिकित्सा के लिए. मैंने अपने अनुभवों से जाना है कि कैंसर के रोगियों को एक भाग हर्रा , चार भाग बहेड़ा और एक भाग आंवला मिलाकर तैयार किया गया त्रिफला अधिक लाभ पहुंचाता है. ऐसा त्रिफला बाजार में व्यवसायिक उत्पाद के रूप में नही मिलता है. इसे घर पर तैयार किया जा सकता है और कैंसर के रोगियों को दिया जा सकता है. ऐसे कैंसर के रोगी जिनकी जीवनी शक्ति कम होती है उनको तो त्रिफला सोच-समझकर देना चाहिए. बहुत से पारम्परिक चिकित्सक ऐसे रोगियों को त्रिफला के स्थान

कैंसर की अंतिम अवस्था में हो पूरा विशवास, तभी जाएँ वैद्य जी के पास

कैंसर की अंतिम अवस्था में हो पूरा विशवास, तभी जाएँ वैद्य जी के पास पंकज अवधिया अच्छा हुआ जो आपने मन की बात पूछ ली. आपने बताया कि आप के परिजन कैंसर से पीडित हैं और किसी वैद्य से चिकित्सा करवा रहे हैं. इस इलाज से फायदा हो रहा है. आपकी शिकायत है कि वैद्य पहले जंगली जड़ी-बूटियों का प्रयोग कर रहे थे पर पिछले कुछ समय से वे पास की आयुर्वेद दुकान से दवाएं खरीदते हैं और फिर लेबल हटाकर देते हैं. ये दवाएं सस्ती लगती हैं पर फिर भी वे पहले की तरह महंगी फीस ले रहे हैं. आप उपचार जारी रखना चाहते हैं पर उनके इस अजीब व्यवहार से आपके मन में संशय उत्पन्न हो रहा है इसलिए आप मेरे पास आये हैं. वैद्य जी की बातें वे ही जाने पर मैं आपको अपने उदाहरण से समझाने की कोशिश करता हूँ. मान लो मुझे कैंसर के किसी रोगी को विदारीकंद  देना है. बरसात के मौसम में जब जंगल में स्थान-स्थान पर पानी भर जता है तब जंगल जाकर इसे लाना मुश्किल होता है. ऐसे में पंसारी की दुकान का सहारा लेना पड़ता है. पर पंसारी की दुकान से चूर्ण लेने पर मिलावट से बच पाना मुक्ष्किल है. खाद्य पदार्थ में मिलावट एक बार चल सकती है

कैंसर की पहचान मनुष्य को देखकर , गर्व है ऐसे पारम्परिक ज्ञान पर

कैंसर की पहचान मनुष्य को देखकर , गर्व है ऐसे पारम्परिक ज्ञान पर पंकज अवधिया जब तक कैंसर का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है  और रोगी को बचाना मुश्किल हो जाता है. आधुनिक चिकित्सक भी कहते हैं कि कैंसर का यदि पहली अवस्था में पता लग जाए तो  कैंसर से सफलतापूर्वक लड़ा जा सकता है.  इसलिए साधारण मनुष्य को देखकर उसे कैंसर है या नही यह जान लेने की पारम्परिक विद्या को सीखने के लिए आप १५ शोधार्थियों का समूह एक सप्ताह तक मेरे साथ समय गुजारने के लिए आया है. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कई तरह के परीक्षण करके पारम्परिक ज्ञान की सहयता से यह पता लगाया जा सकता है कि सामने वाले व्यक्ति को कैंसर है या नही. मैं आपको प्रतिदिन पांच ऐसे  परीक्षणों के बारे में बताउंगा. सम्भव हुआ तो कैंसर रोगियों की मदद ली जायेगी ताकि  इस ज्ञान में आप पारंगत हो सकें. किसी साधारण मनुष्य को दूर से देखकर वह कैंसर रोगी है नही –हमारे पारम्परिक चिकित्सक जान लेते हैं. मैंने उनसे इस ज्ञान को सीखा है पर पारंगत नही हो पाया हूँ. मैंने अब अब ऐसे 600 रोगियों की पहचान की है और समय रहते कैंसर की पहचान हो जाने स