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Showing posts from November, 2020

Consultation in Corona Period-144

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Consultation in Corona Period-143

Consultation in Corona Period-143 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "दिसंबर 2019 में मेरी शादी हुई। शादी के लिए मैं सिंगापुर से भारत आया और शादी के बाद नए साल की शुरुआत में हम वापस सिंगापुर चले गए।  सिंगापुर जाने से पहले हम दोनों ने अपने स्वास्थ की पूरी तरह से जांच कराई क्योंकि उस समय चीन में एक रहस्यमय बीमारी फैली हुई थी। बाद में उसे बीमारी का नाम कोविड-19 रखा गया।  हमारी रिपोर्ट बिल्कुल ठीक थी। हमें किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं थी और हम पूरी तरह से ठीक थे। जैसे ही हम सिंगापुर में पहुंचे और अपने फ्लैट में रहने लगे। 2 दिनों के अंदर मेरी तबीयत बिगड़ने लगी।  सांस लेने में तकलीफ होने लगी और तेज बुखार आने लगा। मुझे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां जांच के बाद पता चला कि चीन में फैली रहस्यमय बीमारी ने मुझे भी जकड़ लिया है। मेरी स्थिति बहुत बिगड़ी।  मुझे वेंटिलेटर पर रखा गया पर यह अच्छी बात है कि मेरी जान बच गई और मुझे पूरी तरह से स्वस्थ होने में 1 महीने का समय लग गया।  फरवरी के अंत तक मैं पूरी तरह से ठीक हो गया और फिर हमने अपने निजी चिकित्सक की अनुमति के बाद संतानोत्पत्ति के प्रयास करने

Consultation in Corona Period-142

Consultation in Corona Period-142 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "बोल बच्चा तुझे क्या चाहिए? जो भी चाहिए मैं तुझे दूंगी।"  मैंने कहा कि मुझे वट्टा काका की जड़ चाहिए।  उसने कहा "क्या? किसकी जड़?"  मैंने फिर से कहा "वट्टा काका की जड़ चाहिए।"  यह शब्द उसके दिमाग की डिक्शनरी के लिए नया था।  दिमाग उसमें उलझ गया और उसका उन्माद जाता रहा।  मैं एक एनजीओ के साथ कोलकाता के एक तांत्रिक के पास था जहां मस्ती में झूमती हुई एक 35 वर्षीय युवती मुझसे मनचाहा वरदान मांगने को कह रही थी।  उस युवती की सहेली की शिकायत के आधार पर एनजीओ ने मुझसे संपर्क किया था और पूछा था कि क्या इस युवती को तांत्रिक के चंगुल से बचाया जा सकता है? क्या इसकी दशा का किसी तरह का कोई उपचार है?  इसमें जो भी खर्च आएगा हम वहन करने को तैयार हैं। आप बिना देरी के कोलकाता आ जाइए और एक बार उस युवती की हालत अपनी आंखों से देख लीजिए।  मैंने उन्हें अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का पता दिया और कहा कि उनसे अगर संपर्क करें तो वे बेहतर तरीके से ऐसे मामलों से निपटना जानते हैं पर संस्था के लोग इस बात पर अड़े रहे कि मैं ही एक बार क

Consultation in Corona Period-141

Consultation in Corona Period-141 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "नए साल की पार्टी मना कर जब जंगल से गगन और उसके मित्र लौटे तो तबियत तो सबकी खराब हुई पर गगन की तबियत बहुत ज्यादा खराब हुई।  उस समय चीन में कोरोना फैला हुआ था और भारत में इसका नामोनिशान नहीं था।  जब गगन की तबियत बहुत बिगड़ने लगी तो हमने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। जब स्थानीय अस्पताल में उसकी तबियत में किसी भी तरह का सुधार नहीं हुआ तो एयर एंबुलेंस की सहायता से हम उसे दिल्ली लेकर गए जहां के डॉक्टरों ने बताया कि ये उसी तरह के लक्षण है जो कि चीन में नए वायरस के कारण प्रभावित हुए लोगों को आ रहे हैं।  उस समय जांच की अच्छी व्यवस्था नहीं थी इसलिए उसकी किसी तरह से जांच नहीं हुई। उसकी हालत बिगड़ती ही चली गई और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।  बड़ी मुश्किल से 15 से 20 दिनों के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसकी जान बच गई। उसकी चिकित्सा कर रहे डॉक्टर उससे दूरी बनाए हुए थे और लगातार डर रहे थे कि यह हो सकता है कि चीन के वायरस के कारण हो रहा हो पर उन्हें यह आश्चर्य हो रहा था कि जो व्यक्ति कभी भी द

Consultation in Corona Period-140

Consultation in Corona Period-140 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "पहले दाहिने हाथ की कलाई कड़ी होनी शुरू हुई फिर उसने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया।  उसके बाद कोहनी पर अटैक हुआ। कोहनी पूरी तरह से सूख गई और बहुत कड़ी हो गई।  इसके बाद कंधे जाम हो गए। 2 साल तक यही स्थिति रही। फिर अचानक से दाहिने घुटने में अकड़न हो गई। फिर 1 साल के बाद दाईं आंख में तकलीफ होने लगी और डॉक्टरों ने बताया कि आंख का पानी अब पूरी तरह से सूखने वाला है।  क्योंकि यह देश के राज परिवार का मामला था इसलिए युवराज की चिकित्सा में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई। हमने दुनिया भर के सभी दिग्गज चिकित्सकों से सलाह ली।  उन्होंने यह कहा कि यह अनुवांशिक समस्या हो सकती है पर ऐसा कहने से पहले उन्होंने तरह तरह की दवाएं युवराज के ऊपर आजमायी।  उन्हें लंबे समय तक फिजियोथेरेपी का सहारा लेना पड़ा। अब वे पूरी तरह से असहाय हो गए हैं और उनका दाहिना हाथ बिल्कुल भी काम नहीं करता है। वह सूखी लकड़ी की तरह हो गया है।  हम न केवल चीन और मलेशिया के पारंपरिक चिकित्सकों से मिले बल्कि ब्राजील के पारंपरिक चिकित्सकों से भी हमने राय ली।  हमने उनसे

Consultation in Corona Period-139

Consultation in Corona Period-139 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "मुझे तो पहले से ही च्यवनप्राश पर शक था। मैंने आपके ढ़ेर सारे लेख पढ़े हैं। आपने उन लेखों के माध्यम से बताया है कि कैसे च्यवनप्राश में कई तरह की मिलावट की जाती है और कम स्तर के घटकों का जब उसमें प्रयोग किया जाता है तो कैसे उसकी गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे नाना प्रकार की स्वास्थ समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।  जैसा कि आप जानते हैं कि मुझे कुछ दिनों से दोनों हाथों में कंपन की समस्या है। सुबह शाम मेरे हाथ बहुत जोर-जोर से कांपते हैं। ऐसा अभी-अभी होना शुरू हुआ है।  चिकित्सकों ने पहले कहा कि यह पार्किंसन जैसा लक्षण है। जब उन्होंने पूरी जांच की तो मुझे बताया कि मुझे पार्किंसन रोग नहीं है।  उन्होंने रोग का कारण जाने बिना इस कंपन को खत्म करने के लिए बहुत सारी दवाएं दी है जिनका प्रयोग मैं लगातार कर रहा हूं  मैंने हाल ही में च्यवनप्राश का प्रयोग करना शुरू किया है इसलिए मेरा शक उसी पर है। मैं आपको कुरियर के माध्यम से इस च्यवनप्राश का सैंपल भेज रहा हूं।  कृपया आप इसकी अपनी प्रयोगशाला में जांच करें और साथ ही पारंपरिक विधियों

Consultation in Corona Period-138

Consultation in Corona Period-138 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "अमेरिका में जब मैंने अपने शरीर की पूरी जांच करवाई तो उन्हें वे 11 रेड लाइन symptoms मिले जिनके आधार पर मुझे बताया गया कि यह Lupus ही है।  11 लक्षणों के लिए मैं अलग-अलग प्रकार की दवाओं का प्रयोग लंबे समय से कर रहा था और Lupus से लड़ते हुए मुझे 5 साल से अधिक का समय हो गया।  आप यह समझ जायें कि 11 लक्षणों के लिए मैं 33 से अधिक दवाओं का प्रयोग करता रहा और तरह-तरह की भोजन सामग्रियां भी लेता रहा।  जिसने जो बताया मैंने उसका प्रयोग किया। मैंने चीनी औषधियों का प्रयोग किया। भारतीय औषधियों को तो मैं बहुत पहले से ले ही रहा था पर एक मर्ज ठीक होता था तो दूसरा मर्ज पकड़ लेता था इसलिए मैंने निश्चय किया कि पहले मैं लंदन जाकर अपनी पूरी जांच करा लूंगा और उनसे बीमारी का नाम जानने की कोशिश करूंगा ताकि उसके बाद फिर मैं पूरी तरह से उस बीमारी का सही इलाज करवा सकूं।  क्योंकि मैं खुद एक डॉक्टर हूं इसलिए मैंने बहुत अधिक दवाओं का प्रयोग न करने का निर्णय लिया। जब लंदन के चिकित्सक कुछ खास नहीं बता पाये और उन्होंने भी कई तरह की दवाएं दे दी तब मैंने अमे

Consultation in Corona Period-137

Consultation in Corona Period-137 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "इंटरकोर्स के आधे घंटे के अंदर बहुत अधिक हिचकी आनी शुरू होती है जो कि 24 घंटे तक लगातार आती रहती है।  किसी भी तरह की दवा से इस हिचकी को नहीं रोका जा सकता है।  24 से 36 घंटे के बाद हिचकी अपने आप बंद हो जाती है और फिर जब अगली बार इंटरकोर्स किया जाता है तो फिर से शुरू हो जाती है।  सारे लक्षण इंटरकोर्स के आधे घंटे बाद ही शुरू होते हैं। ऐसा केस हमने अपने जीवन में कभी नहीं देखा। वह भी 28 वर्षीय युवती के संदर्भ में जिसकी हाल ही में शादी हुई है।  शादी से पहले उसे इस तरह की कोई समस्या नहीं थी। पहली रात से ही इस समस्या का पता चला और शादी के दूसरे दिन ही उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा पर अस्पताल में भर्ती होने का कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि हिचकी किसी भी तरह से नहीं रुक रही थी।  जब हमारे पास यह केस आया और हमारी टीम ने अपने आप को असमर्थ महसूस किया तो हमारे सहायक ने हमें सुझाव दिया कि हम आपसे संपर्क करें।  आप ड्रग इंटरेक्शन पर काम कर रहे हैं। हो सकता है कि यह किसी तरह का ड्रग इंटरेक्शन हो।  वैसे हमने अपने स्तर पर सभी दवाओं की जांच कर ली

Consultation in Corona Period-136

Consultation in Corona Period-136 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "एक व्यक्ति ने जब भ्रमरमार के लिए आठ लाख रूपयों की मांग की तो मुझे उस पर शक हुआ। मैंने उसे कहा कि मुझे वह थोड़ा सा नमूना दे ताकि मैं रायपुर जा कर एक विशेषज्ञ से इसकी जांच करा सकूं।  वह इस बात के लिए तैयार हो गया। मुझे जैसे ही नमूना मिला मैं अगली ट्रेन पकड़कर आपके पास आ गया।" तेलंगाना से आए एक युवा पारंपरिक चिकित्सक मुझे यह सब बातें बता रहे थे।  उनकी बहुत अधिक रुचि भ्रमरमार में थी पर उन्हें किसी भी तरह से यह वनस्पति नहीं मिल रही थी। इस बीच एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और कहा कि यह असली भ्रमरमार है और इसकी कीमत आठ लाख है।  पारंपरिक चिकित्सक परीक्षा करना नहीं जानते थे और उन्हें इस बात का भान था कि उनके साथ ठगी हो सकती है इसलिए उन्होंने मुझसे मदद मांगी।  मैंने उनसे कहा कि मैं आपकी मदद करूंगा।  मैंने उनके द्वारा दिखाए गए नमूने की जांच की और उन्हें बताया कि यह नकली भ्रमरमार है। यह काली सिरस की छाल है जिसे भ्रमरमार के नाम पर बेचा जा रहा है।  अच्छा हुआ आपने मुझसे संपर्क कर लिया अन्यथा आप बड़ी ठगी के शिकार हो जाते।  मैंने उ

Consultation in Corona Period-135

Consultation in Corona Period-135 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "Sjogren’s syndrome का एक केस हमारे पास आया है। यह केस एक 25 वर्षीय युवती का है।  उसे इस प्रकार के लक्षण कुछ वर्षों से आ रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि इस समस्या में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने विरुद्ध काम करने लग जाती है और इससे आंसू की ग्रंथि और लार ग्रंथि विशेष रूप से प्रभावित होती है।  रोगी की आंख पूरी तरह से सूख जाती है और साथ ही मुंह हमेशा सूखा हुआ रहता है। इस समस्या का कोई भी उपलब्ध समाधान नहीं है।  धीरे-धीरे प्रभावित का जीवन नरक तुल्य हो जाता है। उसे लगातार पानी पीना पड़ता है और आंखों को नम रखना होता है।  आधुनिक चिकित्सा पद्धति में जिन दवाओं का प्रयोग इसके लिए होता है वे दवाएं नुकसानों से भरपूर है और मरीज को तरह-तरह की नई समस्याएं हो जाती हैं।  इस युवती के केस के बारे में अलग-अलग चिकित्सकों की अलग-अलग राय है पर वे इस बात पर एकमत हैं कि यह Sjogren’s syndrome है।  जब यह केस हमारे शोध संस्थान में आया तो मुझे आपका नाम सूझा और मैंने अपने वैज्ञानिक दल से कहा कि हमें रायपुर के इन वैज्ञानिक की मदद लेनी चाहिए जो कि

Consultation in Corona Period-134

Consultation in Corona Period-134 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "मेरे 17 वर्षीय बेटे के दोस्तों ने उसका जीना हराम कर दिया है। वे इतना अधिक मजाक उड़ाते हैं कि मेरे बेटे ने दो बार आत्महत्या करने की कोशिश की।"  उत्तर भारत के एक सज्जन मुझे अपनी समस्या बता रहे थे। मैंने उनसे कहा कि मैं आपकी मदद करूंगा।  आप विस्तार से पूरी बात मुझे बताएं। उन्होंने बताया कि उनका 17 वर्षीय बेटा हिमाचल प्रदेश के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। समस्या की शुरुआत उस समय हुई जब वह 14 वर्ष का था।  मुझे बोर्डिंग स्कूल से लगातार यह सूचना आने लगी कि लड़के की तबीयत बार-बार बिगड़ रही है। उसे तेज बुखार हो जाता है और मिर्गी जैसे लक्षण आते हैं।  वहाँ के डॉक्टरों ने जब उसकी पूरी तरह से जांच की तो वे कुछ ज्यादा नहीं बता पाए। उन्होंने कहा कि यह मिर्गी की समस्या नहीं है पर मिर्गी जैसे लक्षण आ रहे हैं।  जब हम अपने बेटे से मिलने बोर्डिंग स्कूल पहुंचे तो हमने पाया कि वह बहुत अधिक कमजोर है। हम एक महीने की छुट्टी में उसे बाहर लेकर आ गए और देशभर के चिकित्सकों से उसकी जांच करवाई पर उसकी समस्या का किसी भी तरह से समाधान नहीं हुआ।

Consultation in Corona Period-133

Consultation in Corona Period-133 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "पेशाब किसी भी तरह से रुक नहीं रही है। बार-बार हो रही है और अधिक मात्रा में हो रही है।  उनकी यह समस्या नयी नहीं है पर अभी बहुत अधिक उग्र हो गई है।  इस कोरोना के समय हम उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं करना चाहते हैं इसलिए घर पर ही छोटा सा अस्पताल बनाया हुआ है। जहां पर उनकी देखभाल की जा रही है।  हम चाहते हैं कि आप इस केस को देखें।  हमने व्यवस्था कर दी है कि हमारे चिकित्सक आपसे बात कर सके। आप जब भी कहेंगे हम आपकी बात उनसे करा देंगे।  ये वही चिकित्सक है जो पिछले 3 वर्षों से इनकी चिकित्सा कर रहे हैं जबसे इनको इस तरह की समस्या है।  शुरू में इनकी जांच करने के बाद बताया गया कि ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण यह समस्या हो रही है। उन्हें तरह-तरह की दवाईयाँ दी गई जिससे कि यह स्थिति नियंत्रण में आ गई पर लंबे समय में ब्लैडर की हालत बिगड़ती गई और अब किसी भी तरह से पेशाब नहीं रुक रही है।" एक 45 वर्षीय सज्जन की पत्नी ने मुझसे फोन पर जब परामर्श के लिए समय मांगा तो उन्होंने पहले ही सारी रिपोर्ट भेज दी और यह अच्छी बात रही कि उन्होंने अपने पति