Consultation in Corona Period-50

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Pankaj Oudhia पंकज अवधिया


"क्या गुग्गुलु के प्रयोग से आंखों की रोशनी कम हो जाती है?


 मैं पिछले कुछ समय से अर्थराइटिस के लिए गुग्गुलु का प्रयोग कर रहा हूँ पर मैंने यह देखा है कि जब भी इसका प्रयोग करता हूँ तो आधे घंटे के बाद मुझे दिखना कम हो जाता है। 


यह स्थिति 4 से 5 घंटे तक रहती है। उसके बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।"


गुजरात से एक सज्जन का यह संदेश आया तो मैंने उनसे कहा कि आप सबसे पहले मुझे यह बताएं कि आप किस ब्रांड का गुग्गुलु प्रयोग करते हैं।


उन्होंने जब ब्रांड का नाम बताया तो मैंने उनसे कहा कि इस ब्रांड में मिलावट की लगातार शिकायतें आ रही है।


 सबसे पहले तो आप यह करिए कि दूसरे ब्रांड के गुग्गुलु का प्रयोग करिए। सम्भव है कि आपकी समस्या का समाधान हो जाए क्योंकि गुग्गुलु के प्रयोग से आंखों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है।


 हो सकता है कि यह मिलावट के कारण हो रहा हो। 


जब उन्होंने दूसरे ब्रांड का गुग्गुलु खरीदा तब भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।


 मैंने उनसे कहा है कि एक उपाय यह है कि आप गुग्गुलु का प्रयोग अर्थराइटिस के लिए बंद कर दें। 


हो सकता है कि यह आपके लिए उपयुक्त न हो। 


उसके स्थान पर कुछ किसी दूसरे फॉर्मूलेशन का उपयोग करें जिससे आपकी समस्या भी सुलझ जाए और आंखों में किसी भी प्रकार की समस्या न हो।


 मैंने उन्हें गुजरात के एक पारंपरिक चिकित्सक का पता दिया और कहा कि आप चाहें तो उनसे अर्थराइटिस की दवा ले सकते हैं। 


पिछले 30 सालों से वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके पूर्वज भी पारंपरिक चिकित्सक ही रहे हैं।


उन्होंने मेरी बात मानी और उन पारम्परिक चिकित्सक से दवा लेनी शुरू की। 


दो महीनों के बाद उनका फोन आया कि पारंपरिक चिकित्सक की दवाई से लाभ तो हो रहा है पर उतना लाभ नहीं हो रहा है जितना कि गुग्गुलु से हो रहा था इसलिए वे गुग्गुलु का प्रयोग फिर से करना चाहते हैं।


 मैंने कहा कि मैं आपकी मदद करूंगा।


 मैंने पूछा कि क्या आप दूध के साथ गुग्गुलु का प्रयोग करते हैं तो उन्होंने कहा कि हां।


 गाय के दूध के साथ या भैंस के दूध के साथ तो उन्होंने कहा कि गाय के दूध के साथ।


गाय का दूध क्या डेरी से आता है तो उन्होंने कहा कि नहीं। मैंने गाय घर में ही पाल रखी है। दिन भर घर में रहती है। बस चारा चराने के लिए ही रावत उसे बाहर लेकर जाता है। 


मैंने कहा कि आप गाय से दूध सुबह निकालते हैं कि जब वह चर कर आती है उसके बाद निकालते हैं तो उन्होंने कहा कि गाय का दूध हम सुबह ही निकालते हैं और ताजा-ताजा ही पी लेते हैं औषधि के साथ।


मैंने उन्हें सलाह दी कि आप सुबह के स्थान पर शाम को जब गाय चरकर आती है उसके बाद दूध निकाले और उस दूध का प्रयोग गुग्गुलु के साथ करें।


 उन्होंने ऐसा करके देखा और फिर मुझे बताया कि इससे उनकी आंखों की समस्या कुछ हद तक कम हुई है। 


अब सूत्र मिल गया था।


 मैंने उनसे कहा कि वे अपनी गाय की फोटो खींचकर भेजें। 


उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। 


बोले कि क्या गाय में किसी प्रकार का दोष है? 


मैंने कहा कि वो तो तस्वीर देखने के बाद ही स्पष्ट होगा।


 जब उन्होंने गाय की तस्वीर भेजी तो सारी स्थिति स्पष्ट हो गई।


 मैंने उन्हें कहा कि यह डायबिटीज की समस्या है तो उन्होंने थोड़े उग्र स्वर में कहा कि मुझे डायबिटीज नहीं है।


 मैंने कहा कि मैं आपके डायबिटीज की बात नहीं कर रहा हूँ गाय के डायबीटीज की बात कर रहा हूँ।


 वे बड़े आश्चर्य में पड़ गए। 


उन्होंने कहा कि क्या डायबीटीज गाय को भी होता है। यह तो मैं पहली बार सुन रहा हूँ। 


मैंने कहा कि हां होता है। विज्ञान इसके बारे में जानता है और उसकी चिकित्सा भी की जाती है।


 आप गूगल करिए, आपको पता चलेगा कि पशुओं को भी डायबिटीज की समस्या होती है। 


मैंने अपने अनुभव से देखा है कि जब डायबिटीज से प्रभावित गाय के दूध का प्रयोग कई प्रकार की जड़ी बूटियों के साथ किया जाता है तो उनमें नकारात्मक प्रतिक्रिया होती हैं और कई प्रकार के विकार उत्पन्न होते हैं जैसे कि गुग्गुलु के प्रयोग से आपकी आंखें कमजोर हो रही है। 


गाय को देखकर बताया जा सकता है कि उसे डायबिटीज है कि नहीं और कितना और किस स्तर का है। 


डायबिटीज वाली गाय के दूध से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है या नहीं यह तो अनुसंधान का विषय है पर यह तय है कि इस दूध में वैसे गुण नहीं होते जैसे कि स्वस्थ गाय के दूध में होते हैं।


दुनिया भर का डेयरी उद्योग इस बात को छिपा कर रखता है या हो सकता है उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी न हो। 


गाय पर शोध करने वाले यह बताते हैं कि गाय को कम ही डायबिटीज होता है पर इसका एक कारण यह भी है कि इस विषय में कोई ध्यान नहीं देता और इस पर गहनता से शोध नहीं करता।


 पारंपरिक चिकित्सक इस बात को जानते हैं कि गाय में कौन सा दोष होने पर दूध पर उसका क्या असर पड़ता है। 


उसे किस प्रकार की जड़ी बूटी के साथ लेना चाहिए और किस प्रकार की जड़ी बूटी के साथ नहीं लेना चाहिए। 


न केवल भारतीय नस्ल की गायों बल्कि दुनिया भर की विभिन्न नस्लों की गायों में डायबिटीज की समस्या होती है।


 दूध बेचने वाले शुद्ध दूध के नाम पर आप से कितने भी पैसे ले लेते हैं पर यह प्रमाणित नहीं करते हैं कि वे जिस गाय का दूध आपको दे रहे हैं वह गाय पूरी तरह से स्वस्थ है कि नहीं। 


आधुनिक चिकित्सा विज्ञान डेयरी उत्पादों के प्रयोग को शक से देखता है और बहुत सारे कैंसर जैसे मामलों में साफ-साफ कह देता है कि आप इनका प्रयोग न करें। 


उसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि यह दूध बीमार पशुओं से आ रहा हो।


 मैंने गुजरात के सज्जन को सलाह दी कि आप दूसरी गाय का दूध प्रयोग करें। इससे आपकी समस्या का पूरी तरह से समाधान हो जाएगा। 


प्रयोग के तौर पर उन्होंने ऐसा करके देखा तो उनकी आंखों की रोशनी कम होने की समस्या का पूरी तरह से समाधान हो गया।


 उन्होंने पूछा कि क्या मेरी गाय की डायबिटीज का टेस्ट किया जा सकता है?


 मैंने कहा कि बिल्कुल टेस्ट किया जा सकता है। आप अपने वेटेनरी डॉक्टर की सहायता लें। वे टेस्ट करके बताएंगे कि गाय को डायबिटीज है कि नहीं। 


जब उन्होंने टेस्ट करवाया तो पता चला कि गाय को बहुत ही उच्च स्तर का डायबिटीज है और उसकी हालत बहुत खराब है। उसे विशेष देखभाल की जरूरत है।


 उन्होंने बताया कि वेटेनरी डॉक्टर ने कहा कि गाय की डायबिटीज की कोई चिकित्सा नहीं है।


 उन्होंने कुछ दवाइयां दी है पर यह कहा है कि यह डायबिटीज पूरी तरह से ठीक नहीं होगा। 


सज्जन ने मुझसे पूछा कि क्या पारंपरिक चिकित्सा में जानवरों को होने वाले डायबिटीज की दवा है?


 मैंने कहा कि बहुत सारी दवाएं हैं पर उन पर अभी अनुसंधान नहीं हुए हैं। 


उनका प्रयोग आपको बताना ठीक नहीं होगा क्योंकि हो सकता है कि उन औषधियों के प्रयोग से दूध की गुणवत्ता पर किसी तरह का प्रभाव पड़े। 


मैंने उन्हें यह भी बताया कि मेरे पास कैंसर के बहुत सारे मरीज आते हैं जिनका कैंसर बहुत तेजी से निर्बाध रूप से फैलता रहता है और किसी भी दवाई से नियंत्रण में नहीं आता है।


 ऐसे अधिकतर मामलों में जब पूरी छानबीन की जाती है तो पता चलता है कि डायबिटिक गाय के दूध का प्रयोग वे कर रहे हैं जिसके कारण कैंसर तेजी से फैल रहा है।



 इसलिए उनको सलाह दी जाती है कि या तो वे ऐसे दूध का प्रयोग बंद कर दें। यदि नहीं कर सकते हैं तो दूध में कुछ औषधियां मिलाए जिससे कि दूध का यह दोष पूरी तरह से खत्म हो जाए। 


नियम से तो जो भी डेयरी दूध की सप्लाई करती है उसकी बोतल में साफ-साफ लिखा रहना चाहिए कि गाय को किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं है विशेषकर डायबिटीज नहीं है।


 उसके बाद ही उसे खुले बाजार में बेचा जाना चाहिए।


मेरी सलाह से वे संतुष्ट नजर आए। 


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