कैंसर में बीरबहूटी, गलत प्रयोग मतलब रोगी की सांस टूटी

कैंसर में बीरबहूटी, गलत प्रयोग मतलब रोगी की सांस टूटी
पंकज अवधिया



आपके नाक और मुंह से लगातार खून बह रहा है. आपकी हालत गम्भीर लगती है.

बीती रात ही मुझे आपके बारे में पता चला और आनन-फानन में सुबह पहली फ्लाईट लेकर मैं आपके पास आ गया. आपको किडनी का कैंसर है और यह रोग की अंतिम अवस्था है.

सारे इलाज नकारा साबित हो चुके हैं. सभी रास्ते बंद हो जाने पर आपने रिश्तेदारों द्वारा बताई गयी दवाएं लेनी शुरू की लेकिन उससे हालत सुधरने की बजाय तेजी से बिगड़ने लगी. आपने बताया कि आप अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए काफी समय से बनारस के एक वैद्य की दवा ले रहे हैं.

वैद्य ने कहा है कि यह कैंसर के लिए नही है पर कैंसर में फायदा करेगी क्योंकि यह आपके शरीर को मजबूत बनायेगी. आधुनिक उपचार बंद होते ही यह दवा शुरू हुयी.

आपने मुझे यह फार्मूला दिखाया है जिसमे से अधिक्तर घटकों की पहचान मैंने कर ली है. मैंने आपके वैद्य से भी बात की है और फार्मूले के बारे में विस्तार से जानकारी ली है. वे कहते हैं कि वे उसकंद पर आधारित फार्मूला आपको दे रहे हैं. पर फार्मूले को देखने पर लगता है कि आपके वैद्य कुछ छिपा रहे हैं.

मैंने आपकी आरम्भिक जांच की. जड़ी-बूटियों से तैयार तीन प्रकार के लेपों को आपके शरीर के विभिन्न अंगों में लगाया पर फिर आपके शरीर की प्रतिक्रिया जानी. आपको लगा कि आपका उपचार शुरू हो गया है. यह उपचार नही बल्कि शरीर की जीवनी शक्ति जांचने का पारम्परिक उपाय है-मैंने आपको समझाने की कोशिश की.

नाक और मुंह से लगातार खून आने से आप बहुत कमंजोर हो गये हैं और बिना किसी सहारे के एक कदम भी नही चल सकते हैं. आपको ल्ल्गता है कि ऐसा कैंसर के कारण हो रहा है. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ऐसा कैंसर के कारण नही हो रहा है.

यह आपके वैद्य की दवा के कारण हो रहा है. वे भले ही इसे उसकंद का फार्मूला कह रहे हों पर इस फार्मूले में बड़ी मात्रा में बीरबहूटी को डाला गया है जिसकी तासीर गर्म होती है. कैंसर में इसका प्रयोग  विशेषकर  ऐसी अवस्था में जिसमे कि आप अभी है  बहुत सम्भलकर किया जाता है.

इस घटक के कारण यह फार्मूला आपके लिए अभिशाप बन गया है. आपके वैद्य इसके साथ उसकंद का प्रयोग भी कर रहे हैं. इसकी बीरबहूटी के साथ नकारात्मक प्रतिक्रिया होती है जिससे बीरबहूटी के दुष्प्रभाव बढ़ जाते हैं.

आपके वैद्य ने ठीक ही कहा कि यह कैंसर का फार्मूला नही है पर मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि इसे कैंसर के रोगियों को नही दिया जाना चाहिए. आप इसका प्रयोग बंद कर देंगे तो आपकी समस्या का समाधान कुछ ही घंटों में हो जाएगा.

यह कडवा सच है कि आप की हालत बहुत बिगड़ चुकी है पर मुझे लगता है कि अभी भी प्रयास किये जा सकते हैं. पारम्परिक चिकित्सा में बहुत से जटिल नुस्खे हैं जो इसी अवस्था में लिए बनाये गये हैं. अब उन्हें आजमाने का वक्त आ गया है. आप उम्मीद न छोड़ें.   

मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.
-=-=-
कैंसर की पारम्परिक चिकित्सा पर पंकज अवधिया द्वारा तैयार की गयी 1000 घंटों से अधिक अवधि की  फिल्में आप इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं. 
सर्वाधिकार सुरक्षित

-=-=-

Comments

Popular posts from this blog

Some well known and promising traditional formulations and home remedies of Chhattisgarh, India needing scientific explanation. 6-405. [Compilation of Summaries and Research Articles] (New comments and results of recent [year 2005 onwards] Ethnobotanical surveys)

गुलसकरी के साथ प्रयोग की जाने वाली अमरकंटक की जड़ी-बूटियाँ:कुछ उपयोगी कड़ियाँ

तेलिया कंद से चमत्कारिक कैंसर उपचार: ठगी का एक और माध्यम