लीवर कैंसर में इमली के स्थान पर गोरखइमली, रक्सीकंद के साथ हमेशा ही भली


लीवर कैंसर में इमली के स्थान पर गोरखइमली, रक्सीकंद के साथ हमेशा ही भली

पंकज अवधिया   





जब आपको यह मालूम है कि आपकी दवा लीवर के कैंसर से प्रभावित लोगों के लिए जानलेवा साबित होती है तो ऐसे में आप उसका प्रयोग बंद क्यों नही कर देते? आपके पिताजी जब जीवित थे तब लगातार कैंसर की चिकित्सा के गुरों को सीखने पर जोर देते रहे मगर आपने जरा भी  रूचि नही दिखाई.



आप बिहार के जाने-माने वैद्य हैं और मधुमेह की चिकित्सा में महारत रखते हैं. हाल ही में जब आपने कैंसर की चिकित्सा करनी शुरू की तो आपने  पाया कि आपकी दवा से लीवर के कैंसर के रोगी समय से पूर्व मर जाते हैं.



आपने दवा में फेरबदल करने की कोशिश की पर नतीजा सिफर ही रहा. आप अपने पिताजी का फार्मूला उपयोग कर रहे हैं जो कि उनके पास पीढीयों से था.



आपके पिताजी लीवर के कैंसर की चिकित्सा में महारत रखते थे. आपने फार्मूला जानने में रूचि दिखाई पर उसके प्रयोग के बारे में पिताजी से नही सीखा.



यही कारण है कि आपकी दवाएं रोगियों के लिए अभिशाप साबित हो रही है.  आपने बताया कि आप रोगियों के लिए एक शरबत बनाते हैं जिसमे कुलफा के बीज, ककडी के बीज, काहू के बीज और इमली सहित तीस जड़ी-बूटियाँ मिलाते हैं. इनमे से दस जड़ी-बूटियाँ विषयुक्त हैं जिनका गलत प्रयोग रोगी के लिए नुक्सानदायक हो सकता है.



आप इस शर्बत को दिन में तीन बार देते हैं. तीन दिनों के अंदर ही रोगियों की हालत बिगड़ने लगती है. पांचवे दिन उन्हें उल्टियां शुरू हो जाती है और सातवे दिन उनकी मृत्यु हो जाती है. आपको कहना पड़ता है कि ऐसा कैंसर के कारण हुआ है. रोगियों के भोले-भाले परिजन आपकी बातों में आ जाते हैं और वापस लौट जाते हैं. इस सब से परेशान होकर आप मेरे पास आये हैं. मैं आपकी मदद करूंगा.



आपने विषयुक्त जड़ी-बूटियों के शोधन की जो विधि मुझे बताई हैं उसमे तो कोई दोष नजर नही आता है. मैं आपको यही सलाह देना चाहता हूँ कि आप फार्मूले से इमली को हटा दें और यदि आपके पास गोरखइमली हो तो इमली के स्थान पर इसका प्रयोग करें.



आप इस फार्मूले के दोष मिटाने के लिए ढूलेना कंद का प्रयोग क्र सकते हैं. इस कंद के साथ रोगियों को किसी भी तरह की चाय म पीने की हिदायत दें   



इसके साथ रक्सीकंद का प्रयोग फार्मूले को  पूरी तरह से दोषमुक्त बना देगा और यह लीवर के कैंसर के लिए सही मायने में उपयोगी बन जाएगा. ये सब जड़ी-बूटियाँ मेरे मित्र पारम्परिक चिकित्सकों के पास उपलब्ध हैं. आप चाहे तो मैं आपके लिए इनका प्रबंध कर सकता हूँ.

  

मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.

-=-=-

कैंसर की पारम्परिक चिकित्सा पर पंकज अवधिया द्वारा तैयार की गयी 1000 घंटों से अधिक अवधि की  फिल्में आप इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं. 




सर्वाधिकार सुरक्षित


-=-=-

Comments

Popular posts from this blog

Some well known and promising traditional formulations and home remedies of Chhattisgarh, India needing scientific explanation. 6-405. [Compilation of Summaries and Research Articles] (New comments and results of recent [year 2005 onwards] Ethnobotanical surveys)

गुलसकरी के साथ प्रयोग की जाने वाली अमरकंटक की जड़ी-बूटियाँ:कुछ उपयोगी कड़ियाँ

तेलिया कंद से चमत्कारिक कैंसर उपचार: ठगी का एक और माध्यम