Consultation in Corona Period-6

Consultation in Corona Period-6

Pankaj Oudhia पंकज अवधिया 


"कोरोना के चंगुल से तो मैं निकल गया पर उसने मेरे फेफड़े को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया है. न मुझे ठीक से चलते बनता है न ही काम करते. लगता है अब यह जीवन भर का सिर दर्द हो गया है। आपके पास कोई उपाय हो तो बताएं। मैं तो केवल फिजियोथैरेपी पर ही टिका हुआ हूं।" यह संदेश स्पेन के उस डॉक्टर मित्र का था जो दुनिया भर में अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जी जान से कोरोनावायरस रोगियों की सेवा की और उसके बाद खुद ही इसके शिकार हो गए। बड़ी मुश्किल से उनकी जान बची। ठीक होने के बाद वे फिर से कोरोनावायरस की लड़ाई में शामिल होना चाहते थे।लेकिन फेफड़ों की समस्या के कारण उन्हें हमेशा घर में रहना पड़ता है।


 मैंने उन्हें बताया कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में बहुत सारे ऐसे नुस्खे हैं जोकि इस दिशा में दुनिया की मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ में एक विशेष प्रकार की मछली को 13 प्रकार के औषधीय चावल के साथ 13 दिनों तक दिया जाता है और इस चक्र को तीन से चार बार दोहराया जाता है। इससे फेफड़े के टिशू फिर से रिपेयर हो जाते हैं और वह फिर से पहले की तरह काम करने लग जाता है।


 कोरोना काल को निकल जाने दीजिए उसके बाद आप  छत्तीसगढ़ आइए और यहां के पारंपरिक चिकित्सकों की सहायता से इस दुर्लभ ज्ञान के माध्यम से अपने आप को ठीक कर लीजिए। मैंने उन्हें आमंत्रण दिया पर वे त्वरित उपाय चाहते थे।


 मैंने उन्हें कुछ सामान्य औषधियां सुझाई और साथ में कुछ विशेष तरह के जंगली फलों के बारे में बताया पर मुश्किल यह थी कि यह सब स्पेन में उपलब्ध नहीं था और विशेषकर इस कोरोना काल में।


 फिर जब मैंने भारतीय औषधि उत्पादों की सूची खंगाली तो उसमें मुझे एक उत्पाद दिखा जो कि उन चिकित्सक मित्र की मदद कर सकता था।


 मैंने उनसे पूछा कि क्या भारतीय औषधीय उत्पाद स्पेन में मिल सकते हैं? उन्होंने कहा कि नहीं, यह संभव नहीं है।


 जब मैंने उनसे कहा कि श्री श्री के उत्पाद तो वहां मिलते ही होंगे।


 उन्होंने हामी भरी और उत्पाद का नाम जान कर उसकी तलाश में जुट गए।


 उन्हें दूसरे यूरोपीय देशों से यह उत्पाद मिल गया और उन्होंने इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया।


 आश्चर्यजनक रूप से 5 से 10 दिनों में उनके फेफड़े की कार्य क्षमता में काफी सुधार होने लगा।


 वे स्वयं डॉक्टर हैं इसलिए उन्होंने वैज्ञानिक परीक्षण भी किए और पाया कि उनके फेफड़े की कार्य क्षमता में निश्चित ही सुधार हो रहा है।


 1 महीने के अंदर उन्होंने फिर से अस्पताल ज्वाइन कर लिया और आज तक मरीजों की देखभाल में लगे हुए हैं।


श्री श्री का उत्पाद प्राप्त करने के बाद उन्होंने प्रश्न दागा था कि इसमें तो कुछ दूसरी चीज लिखी हुई है फिर कैसे यह फेफड़ों को ठीक करेगा?


 मैंने उनसे कहा कि शायद श्री श्री से जुड़े वैज्ञानिक भी इस तथ्य को नहीं जानते हैं कि उनका यह उत्पाद कोरोना से होने वाले नुकसान की भरपाई में कितना अधिक मददगार है। 


मैंने दुनिया भर में सैकड़ों लोगों को इस बात के बारे में बताया है विशेषकर उन लोगों को जिनके फेफड़े कोरोनावायरस से उबरने के बाद ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।


 सभी भारतीय औषधि निर्माता इम्यूनिटी के चक्कर में लगे हुए हैं जबकि उनके उत्पाद जोकि पहले से ही बाजार में है कोरोना के कारण होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में सक्षम है।


 केवल उनके वैज्ञानिक अनुमोदन की आवश्यकता है। यह बात मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से कई बार कहीं पर शायद ही किसी का ध्यान इस पर गया हो।


 स्पेन के उस डॉक्टर मित्र ने बताया कि हम भारतीय औषधि अश्वगंधा का प्रयोग पहले अनुमोदित कर रहे थे पर जब हमने क्लिनिकल ट्रायल और ऐसे ही आम लोगों के अध्ययन से यह देखा कि यह कोरोना को फैलने में मदद करता है और शरीर को कोरोना के प्रति संवेदी बनाता है तो हमने तुरंत ही इसका प्रयोग रोक दिया।


 बाद में हमें पता चला कि इम्युनिटी बढ़ाने वाले बहुत से प्राकृतिक और कृत्रिम उत्पाद कोरोनावायरस की मदद करते हैं और शरीर को कमजोर बनाते हैं।


 इसलिए ऐसे उत्पादों का प्रयोग बहुत संभाल कर और दक्ष चिकित्सकों के मार्गदर्शन में करना चाहिए।


 उनसे हुई चर्चा में यह बात भी सामने आई कि कोरोना जब शरीर में प्रवेश करता है तो शरीर प्रतिक्रिया स्वरूप अपना तापक्रम बढ़ाता है ताकि शरीर कोरोनावायरस को निष्क्रिय कर सके पर दुनिया भर के डॉक्टर इस बढ़े हुए तापक्रम को कम करने का प्रयास करते हैं। इससे एक तरह से वे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते है।



 यह इस कारण हो रहा है क्योंकि कोरोना को पूरी तरह जाने बिना ही उसकी चिकित्सा के प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोनावायरस का जाना माना विशेषज्ञ कोई नहीं है क्योंकि कोरोना को दुनिया के सामने प्रकट हुए कुछ ही महीने हुए हैं। 


दूसरे वायरस पर अपने अनुभव के आधार पर लोग तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं जोकि कोरोना से अधिक घातक है।


 जनवरी में कोरोनावायरस चीन में फैल रहा था तब वहां के वीडियो को दिखाकर जब मैंने पारंपरिक चिकित्सकों से इम्युनिटी बढ़ाने वाली बहुत सी औषधियों की चर्चा की तो उन्होंने उस समय ही कह दिया था कि भले ही इम्युनिटी के लिए अश्वगंधा की भूमिका है पर कोरोनावायरस में यह घातक सिद्ध होगा।


 इस पर मैंने बहुत कुछ लिखा पर फिर भी इसे नजरअंदाज करते हुए अश्वगंधा और गिलोय कोरोना के लिए अनुमोदित किया जा रहा है।


 इस कोरोना काल में जबकि पारंपरिक चिकित्सकों को फ्रंटलाइन में होना चाहिए था वे हाशिये पर है। नतीजा सबके सामने है। स्थिति बेकाबू होती जा रही है पर अभी भी देर नहीं हुई है।


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