कैंसर में कुकरी पोटा जड़ी, इस महारोग के दोबारा होने की जब हो सम्भावना बड़ी

कैंसर में कुकरी पोटा जड़ी, इस महारोग के दोबारा होने की जब हो सम्भावना बड़ी  
पंकज अवधिया




कैंसर ने नही बल्कि गलत दवाओं ने आपकी हालत खराब कर दी थी और आप मौत के मुंह में पहुँच गये थे.

आपने सत्रह साल पहले मुझसे पहली बार संपर्क किया था जब आपको मुंह का कैंसर था और आप रोग की अंतिम अवस्था में थे. आपका आधुनिक उपचार बंद हो चुका था और वैद्यों की दवाएं भी एक-एक करके नकारा साबित हो रही थी.

आपने आखिर बार दवा राजस्थान के वैद्य से ली थी जिन्होंने मन ही मन आपकी मृत्यु को निश्चित मान लिया था. जब आप मेरे पास आये थे तो आपकी स्थिति बिलकुल वैसी ही थी जैसी कि किसी विषैले सर्प के डस लेने पर होती है.

मैंने पूछा भी था कि क्या कुछ घंटों पहले आपको किसी सर्प ने डसा है तब मुझसे बताया गया था कि कैंसर के कारण ऐसा हो रहा है. मेरे दिमाग में उस समय कुछ जड़ी-बूटियों के नाम आये जिनके सेवन से ऐसे भयानक लक्ष्ण दिखते हैं.

जल्दी ही पता लग गया कि राजस्थान के वैद्य आपको दूध बेल दे रहे थे. आपकी बुरी स्थिति के लिए दूध बेल दोषी थी न कि कैंसर.

उन्होंने इस जहरीली वनस्पति का प्रयोग बिना किसी शोधन के अंतिम अस्त्र के रूप में किया था. यदि आप मेरे पास नही आते तो कुछ समय में आपकी मृत्यु तय थी.


मैंने कैंसर पर अपना ध्यान केन्द्रित नही किया. मेरा ध्यान दूध बेल के जहर को खत्म करने में था. कुल दो सप्ताह लगे आपको जहरमुक्त करने में. शरीर से जहर के निकलते ही आपका स्वास्थ तेजी से सुधरने लगा और कैंसर का फैलाव भी रुका. 

मैंने  दूध बेल का असर खत्म करने के लिए छेरी  पोटा नामक जानी-मानी जड़ी-बूटी का प्रयोग किया. शरीर से विष निकालने के लिए यह उत्तम दवा है. कुछ वर्ष पूर्व मैंने जापान के चिकित्सक मित्र को भी इसका प्रयोग सुझाया था जब परमाणु विकिरण से वहां लोग चीटियों की तरह मरने वाले थे.

इसके बाद मैंने आपका विधिवत उपचार शुरू किया . पहले आपके शरीर की जीवनी शक्ति को मजबूत किया औत फिर टयूमर को टुकड़ों में तोड़कर मुंह से बाहर निकालने का काम.

चार वर्ष के लम्बे समय में काफी उतार-चढाव के बाद आप कैंसरमुक्त हो गये. तीन वर्ष तक आपकी दवा और चलती रही. जब कैंसर के दोबारा होने की सारी आशंकाएं खत्म हो गयी तब आपको स्वास्थवर्धक भोजन सामग्रियों के साथ जीवन जीने का सुझाव देकर वापस भेज दिया.

आज आप इतने वर्षों के बाद आये हैं. आपके मन में इन वर्षों में लगातार यह डर बना रहा कि कहीं कैंसर फिर से वापस न आ जाए और आपको एक बार फिर भयानक कष्ट उठाना पड़े इसलिए इस डर को खत्म करने आप मुझसे मिलने आये हैं.

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि इस लम्बे समय में मुझे कैंसर के बहुत से नये कारगर फार्मूलों की जानकारी मिली है. इनमे से एक है कुकरी पोटा पर आधारित फार्मूला.

इसे आपको आगामी तीन वर्षों तक लेना होगा. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है जिससे दोबारा कैंसर होने की सम्भावना पूरी तरह से खत्म हो जाती है. आप इसे नियमपूर्वक लें.

मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.
-=-=-
कैंसर की पारम्परिक चिकित्सा पर पंकज अवधिया द्वारा तैयार की गयी 1000 घंटों से अधिक अवधि की  फिल्में आप इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं. 
सर्वाधिकार सुरक्षित

-=-=-

Comments

Popular posts from this blog

Some well known and promising traditional formulations and home remedies of Chhattisgarh, India needing scientific explanation. 6-405. [Compilation of Summaries and Research Articles] (New comments and results of recent [year 2005 onwards] Ethnobotanical surveys)

गुलसकरी के साथ प्रयोग की जाने वाली अमरकंटक की जड़ी-बूटियाँ:कुछ उपयोगी कड़ियाँ

तेलिया कंद से चमत्कारिक कैंसर उपचार: ठगी का एक और माध्यम