Consultation in Corona Period-292 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया

Consultation in Corona Period-292 Pankaj Oudhia पंकज अवधिया "मेरा ऑर्गेनिक का काम है सर जी। आप मेरा चावल खा कर तो देखिए। आपकी तबीयत खुश हो जाएगी।" ऐसा कह कर मुझे चावल का एक सैंपल उसने मुझे दे दिया। मैंने चावल को देखते ही कहा कि यह तो काली मूंछ है। इसकी क्या विशेषता है?" "सर, ये ऑर्गेनिक है।" मैंने कहा कि आप ऑर्गेनिक का सर्टिफिकेट दिखाइए। कौन सी संस्था ने इसे ऑर्गेनिक सर्टिफाई किया है? मेरे इस प्रश्न पर वह बगले झांकने लगा और फिर कहने लगा कि यह बस्तर का काली मूंछ है इसलिए यह ऑर्गेनिक है। मैंने कहा कि यह तो कोई बात नहीं हुई। आप इसे अधिक कीमत पर बेच रहे हैं और कह रहे हैं कि यह ऑर्गेनिक है और आपके पास किसी भी प्रकार का सर्टिफिकेट भी नहीं है। बस्तर में तो रासायनिक और जैविक दोनों खेती होती है। एक जमाने में बस्तर में केवल जैविक खेती होती थी और वह तो बहुत पुरानी बात है। "सर ये बस्तर का है इसीलिए मैं इसे आर्गेनिक के नाम पर बेचता हूं और मेरे पास इसके ऑर्गेनिक होने का कोई प्रमाण नहीं है। मैंने कहा कि यह तो सरासर धोखाघड़ी है। इस पर उसने कहा कि वह देश भर में इसकी आपूर्ति करता है ऑर्गेनिक के नाम पर आज तक किसी ने उससे यह नहीं पूछा कि यह किस प्रकार से ऑर्गेनिक है और इसके लिए किसी प्रकार का सर्टिफिकेट दिखाओ। मेरी बात भिलाई के एक प्रसिद्ध संस्थान के मालिक से हो रही थी जो अपने आर्गेनिक उत्पादों के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में जाना जाता है। पहली बार उसकी पोल खुली थी। उसने मुझसे विदा लेने में ही अपनी भलाई समझी। मुझे याद आता है कि 2005 में बस्तर के मूसली माफिया भी इसी तरह का काम करते थे। उनके फार्म में उत्पादित चावल ऑर्गेनिक के नाम पर दिल्ली हाट में बिका करता था। एक बार किसी ने जांच करवा ली तो पता चला कि यह तो आर्गेनिक नहीं है बल्कि रासायनिक खेती से उगाया गया है। उन मूसली माफिया ने हार नहीं मानी। आपूर्ति करने वाली एजेंसी के क्लर्क को पटाया। अपने स्थान पर अपने भाई का नाम लिखवा दिया और सालों तक रासायनिक उत्पाद की आपूर्ति जैविक के नाम पर होती रही। पता नहीं आजकल भी होती है कि नहीं। इसलिए जब भी आपको कोई ऑर्गेनिक कहें तो आप उससे सर्टिफिकेशन की जानकारी अवश्य लें क्योंकि हमारे देश में ऑर्गेनिक के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी हो रही है और आपको रासायनिक उत्पाद के लिए ऑर्गेनिक के नाम पर अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करनी पड़ रही है। सावधान रहें। सचेत रहें। सर्वाधिकार सुरक्षित

Comments

Popular posts from this blog

Some well known and promising traditional formulations and home remedies of Chhattisgarh, India needing scientific explanation. 6-405. [Compilation of Summaries and Research Articles] (New comments and results of recent [year 2005 onwards] Ethnobotanical surveys)

Traditional medicinal knowledge about useful herb Imli or Amli (Tamarindus indica; family Caesalpiniaceae) in Chhattisgarh, India

Harvesting, Processing and Trading of wonder crop Safed Musli (Chlorophytum borivilianum) : My research and experience